दोस्तों हनुमान जी अपने भक्तों पर आने वाले तमाम तरह के कष्ट औरपरेशानियों को दूर करते है , ऐसी मान्यता है कि भगवान हनुमान बहुत जल्दी खुश होने वाले देवता है,इनकी पूजा पाठ में कुछ अधिक करने की जरूरत नहीं होती है हनुमान जी भक्त की थोड़ी सी भक्ति में ही खुश हो जाते है। हिन्दू धर्म मई सुंदरकांड पाठ का विशेष महत्व बताया गया है, सुंदरकांड का महत्व
हनुमान जी जल्द खुश होने वाले देवता है जो अपने भक्तों की भक्ति को देख कर बहुत ही जल्दी खुश हो जाते है ,वह बल ,बुद्धि ,साहस,और कृपा प्रदान करने वाले माने जाते है , सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते है,जो भी व्यक्ति प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करता है उसकी एकाग्रता और बल ,साहस और आत्मविश्वाश में वृद्धि होती है ,सुंदरकांड का पाठ करने से इंसान के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है , उसके द्वारा किये जाने वाले किसी भी काम का परिणाम हमेशा सकारात्मक और सिद्ध होता है,इसलिए हर घर में सुंदरकांड पाठ अवश्य करने को बोला गया है सुंदरकांड का पाठ रोजाना करने से व्यक्ति के अंदर नकारात्मक शक्तियाँ (भूतप्रेत ,नजरदोष ,जादूटोना )सभी दूर हो जाती है
कुछ महत्वपूर्ण नियम
1- अगर आप विशेष रूप से फल प्राप्ति के लिए सुंदरकांड का पाठ कर रहे है तो इसकी शुरुवात मंगवार या शनिवार के दिन से ही करे,परन्तु यदि आपके जीवन में परेशनियाँ या मुशीबत अधिक है तो आप ये पाठ नियमित रूप से कर सकते है।
2 - सुंदरकांड का पाठ करने से पहले आपको स्वछता का विशेष ध्यान रखना है ,और सबसे पहले आप सुंदरकांड मंगलवार या शनिवार या फिर जब भी आपको पाठ करना होगा उस दिन आप सबसे पहले स्नान(नहा )ले।
3 - वस्त्र में यदि हो सके तो आपको केवल लाल , पिले,केसरिया ,रंग के ही कपडे पहने है ,आपको काले ,नीले , हरे रंग के कपडे नहीं पहनने है।
4 - दोस्तों सुंदरकांड का पाठ आरभ करने से पहले आप घी ,या फिर सरसों के तेल का दिया जलाये और फिर एक लोटे में जल ले, उसके बाद थोड़ा सा जल अपने दाहिने हाथ में ले और संकल्प ले , और आप को हाथ में जल ले के संकल्प लेना , जो भी आपका मनोरथ है या जितना आप ये पाठ पढ़ सकते है उतना पढ़ने का संकल्प आपको लेना है, क्यूकी दोस्तों बहुत बार कहीं व्यक्ति पूरा सुंदरकांड नहीं पढ़ पाते ,तो इसलिए आप थोड़ा थोड़ा दो दिन या फिर जब आप मंगलवार को शुरू करते है पाठ तो पाठ शनिवार को सुंदरकांड का पाठ पूरा पढ़ सकते है।
5 - सुंदरकांड का पाठ आप अपने पुरोहित (पंडित ) या फिर यदि आप सुंदरकांड का पाठ पूरा पढ़ सकते हो तो आप स्वयं भी पाठ पढ़ सकते है।
हनुमान जी की पूजा शुरू करने से पहले आपको ध्यान रखना आपको प्रथम पूज्य गणेश जी के नाम का जाप (ॐ गणेशाय नमः )या उनकी पूजा करनी है ,और फिर प्रभु श्री राम के नाम का जाप या उनकी वंदना करनी है और फिर आपको श्री हनुमान जी की पूजा या सुंदरकांड का पाठ आंरभ करना है.
6 - सुंदरकांड का पाठ करने से पहले पूजा स्थल पर रखी बजरंगबली की मूर्ति की विशेषरूप पूजा से करनी चहिये , साथ ही सीता राम जी की मूर्ति या फोटो हनुमान जी के पास जरूर रखे।
हनुमान जी की पूजा में यदि आपसे हो सके तो आप फल,फूल ,मिठाई, सिंदूर,या चमेली का तेल से करे, और यदि आपके पास इतना सब कुछ नहीं है तो आप थोड़े से फूल या गुड़ या चने रख के भी पूजा कर सकते हैं।
7 -सुंदरकांड का पाठ करने से पहले रामचरितमानस की भी पूजा करनी चाहिए और उस पर तिलक जरूर लगये।
8 - जब आप पाठ पूरा पढ़ ले ,तो अंत में हनुमान जी की आरती पढ़े।
9 - और अंत में हनुमान जी को भोग लागए ,भोग में आप बूंदी ,फल,रोटी,लाडू ,आदि ,जितना आपसे हो सके आप अपने अनुसार चढ़ा सकते है।
10 - हनुमान जी भोग लगाने के बाद खुद भी प्रसाद ले और अपने परिवारजन में सभी को प्रसाद बाँट दे।
महत्वपूर्ण जानकारी
अगर आप सुंदरकांड पाठ करते हो तो आपको एक बात ध्यान रखनी है , जिस दिन आप सुंदरकांड पाठ करे , उस दिन सात्विक भोजन खाये ना कि प्याज ,लहसुन ,और मदिरा का सेवन बिल्कुल ना करे ,न ही किसी को करने दे,क्योकि यदि आप इन सबका सेवन करते हो तो नुकसान आपको ही होगा और ये पाठ आपको लाभ की जगह नुकसान ही देगा , इसलिए दोस्तों जिस दिन आप पाठ करे , उस दिन आप इन चीज़ो से दूर रहे , और सात्विक भोजन खाये।
ध्यान रखे आपको उस दिन मन और तन से पवित्र रहना है ,मतलब आपको तन से पवित्र रहना है और किसी के भी प्रति गंदी भावना अपने मन में नहीं रखनी है ।
दोस्तों हनुमान जी सबसे जल्दी अपने भक्तों पर प्रसन्न होने वाले देव है,और शास्त्रों में भी बताया गया है कि हनुमान जी की कृपा पाने का बढ़िया कोई उपाए नहीं है ,और दोस्तों सुंदरकांड के पाठ से हनुमान जी के साथ भगवान श्री राम की भी कृपा मिलती है , और कहते हैं इस कलयुग में यदि कोई हनुमान जी की पूजा करता है तो उस पर त्रिदेवों की भी कृपा होती है ,और जो नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करते है तो उनके सभी दुःख दूर हो जाते हैं ,क्योकि इस कांड को हनुमान जी के सफलता का कांड भी कहा जाता हैं, जिस कारण जो भी सुंदरकांड का पाठ भी करता है ,उसको सफलता जरूर मिलती है।
दोस्तों ये तो आपको पता ही होगा कि सम्पूर्ण रामचरितमानस में प्रभु श्री राम के गुणों और उनकी वीरता उनके पुरुषार्थ को बड़े स्वर्ण अछरो में दर्शया गया है , लेकिन सुंदरकांड मात्र एक ऐसा अद्याय है जो हनुमान जी की विजय का कांड है मनोवैज्ञानिक तौर पर देखा जाये तो ये पाठ आत्मविश्वाश और आत्मशक्ति को बढ़ाने वाला कांड हैं।
इस कांड को करने से व्यक्ति की इच्छा शक्ति में वृद्धि होती है और मानसिक तौर पर इंसान मजबूत होता है और किसी भी कार्य को करने की शक्ति व्यक्ति को मिलती है ।
ये सब तो आप जानते होंगे कि हनुमान जी भगवान शिव के रूप में उनके ग्याहरवे रूद्र अवतार में एक वानर है ,जो समुद्र को लांघकर लंका गए थे ,और वहाँ जा के माता सीता का पता हनुमान जी ने लगाया था ,और भगवान राम को माता सीता का पता बताया।
तो दोस्तों आप खुद ही सोच सकते है जब हनुमान जी श्री राम जी के इतने बड़े बड़े कार्य पूरे कर सकते है तो हम मनुष्य के कार्य तो उनके लिए कुछ भी नहीं ,वो कार्य तो हनुमान जी की कृपा से छंण भर में है।
इसलिए दोस्तों अंत में हम बस इतना ही कहना चाहेंगे यदि आपकी भक्ति सच्ची हैं ,आपका मन पवित्र है आपका अपने भगवान पर विश्वाश है ,तो यकीन मानिये भगवान आपकी जरूर सुनेगे और आप भगवान की कृपा जरूर होगी।
तो दोस्तों आज के लिए इस ब्लॉग में बस इतना ही ,आप अपना ध्यान रखे ,खुश रहे ,अपनी मंज़िल (सफलता )को पाने के लिए खूब महेनत करे, तो दोस्तों यदि आपको ब्लॉग पसंद आया हो तो ब्लॉग को लाइक करे और सभी को शेयर जरूर करे।
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