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जानिए हनुमान जी की इन शक्तिशाली चौपाइयों के बारे में । और जाने भगवान को कैसे करे प्रसन्न ।


जय  श्री राम दोस्तों जय हनुमान दोस्तों आज  हम आपको श्री हनुमान जी की कुछ ऐसी चौपाइयों के बारे में बताएँगे जिसको यदि आप रोजाना बोलते हो या रात को सोते समय रोजाना बोलते हो तो यकीन मानिये श्री हनुमान जी की कृपा आप पर जरूर होगी ,और आज के ब्लॉग में हम आपको बताएंगे की कैसे आप भगवान को प्रसन्न कर सकते है। 

दोस्तों बहुत से लोगों को रात को सोते समय डर लगता है , अनचाहे डर के कारण आपको गंदे गंदे सपने होते है जिस कारण आप  सो नहीं पाते है और क्योंकि शायद नकारात्मक ऊर्जा आपके चारों ओर रहती है जिस आपको अच्छा  महसूस नहीं हो पाता है।  

तो आप  इसके निवारण  लिए श्री हनुमान जी की इस चौपाई को बोल सकते है। 

 जो चौपाई इस प्रकार से है -

चौपाई - भूत पिशाच निकट नही आवे।  महावीर जब नाम सुनावे।।

अर्थ - जहां महावीर हनुमान का नाम सुनाया जाता है ,वहां भूत ,पिशाच पास भी नहीं आते है। 

दोस्तों यदि आप शारीरिक रूप से कमजोर है आप में बल की कमी है आपका शरीर निर्बल हो ,आपके जीवन में दुःख आ ही रहा है या आपको ज्ञान विद्या चाहिए तो आपको  इस चौपाई को  जरूर बोलना चाहिए। 


चौपाई -  बुद्धिहीन तनु जानिके ,सुमिरो पवन कुमार।।

                   बल  बुद्धि विद्या देहु मोहि ,हरहु कलेश विकार।।

अर्थ - हे पवन कुमार में आपका सुमिरन करता हूँ ,आप ही जानते हो कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है  मुझे शारीरिक बल ,सुबुद्धि एवं ज्ञान दीजिये और मेरे दुखों व दोषों का अंत (नाश )कर दीजिये।

दोस्तों यदि आपके जीवन में संकट रुकने का नाम नहीं ले रहे है परेशानियाँ आ ही रही है तो आपको श्री हनुमान जी इस चौपाई को जरूर बोलना चाहिए। 


चौपाई  - संकट कटे मिटे सब पीरा। जो सुमिरे हनुमत बलबीरा।। 

अर्थ - हे वीर हनुमान जी जो भी आपका सुमिरन करता रहता है ,उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है। 

एक और चौपाई है दोस्तों जिसको आप बोल सकते है जिसको बोल के आप के सारे संकट दूर हो सकते है।

चौपाई  - संकट ते हनुमान छुडावे।  मन कर्म वचन जो लावे।।

 अर्थ - हे हनुमान जी विचार करने में कर्म करने में और बोलने  में जिसका ध्यान आप में रहता है ,तो आप उनको सब संकटों से छुड़ाते है। 

  दोस्तों यदि आपको पूरी हनुमान चालीसा याद नहीं है  तो आप इन चौपाइयों का सुमिरन कर सकते है आपको जरूर लाभ होगा। 



दोस्तों अक्सर लोगो के मन में ये सवाल होता है की हम भगवान को प्रसन्न  कैसे करे ? और क्या पूजा पाठ से हम सब कुछ प्राप्त कर सकते है ? ऐसे बहुत से सवाल लोगों के मन में आते है।  

सबसे पहले हम आपको ये बता दे की यदि कोई ये सोचता है या जिसके मन में ये बात आती है- कि यदि हम भगवान को प्रसन्न कर देंगे तो  फिर हमें कुछ करने की जरूरत नहीं है। या  हमें सबकुछ बैठे बैठाया मिल जायेगा , ऐसा कुछ लोग सोचते होंगे, परन्तु ये गलत है। 


दोस्तों एक बात हमेशा याद रखना मनुष्य एक कर्म प्रधान है बिना कर्म के मनुष्य कुछ भी नहीं कर सकता है और भागवत गीता में भी भगवान श्री कृष्ण ने कहा था - मनुष्य  को यदि अपने जीवन में सफलता चाहिए तो उसको कर्म तो करना ही पड़ेगा बिना कर्म के मनुष्य कुछ भी नहीं कर सकता है। 

इसलिए दोस्तों भक्ति करना अच्छी बात  है परन्तु अपना कार्य छोड़ कर , अपना सब कुछ काम धाम छोड़ कर बस भक्ति ही करना गलत है। हम ये तो नहीं कहते  भक्ति मत करो। परन्तु हम ये जरूर कहते है कि भक्ति के साथ आप कर्म और महेनत जरूर करे तभी सही मायने में आप पर भगवान की कृपा होगी। 

और कहते है न दोस्तों कर्म ही पूजा है।  इसलिए जहां  आपका कर्म जरुरी है वहां आप पर  भगवान का आश्रिवाद भी जरुरी है , क्युकी दोस्तों इस दुनिया में एक ऐसी शक्ति भी है जो हम सबको चला रही है उसको आपको कभी भूलना नहीं चाहिए। 

अब दोस्तों आप में से बहुत से लोग सोचते होंगे यदि हम 2 या 3 घंटे रोजाना भक्ति करते है तो भगवान हमारी सुन लेगा और हमको कुछ करने की जरुरत नहीं है, अगर आप ऐसा सोचते हो तो फिर आप गलत हो। 

दोस्तों क्या पता भगवान भी आपके बारे में ये सोचते होंगे कि जब मेरा भक्त मेहनत  करेगा , जब मेरा भक्त किसी कार्य पर परिश्रम करेगा तो तभी मै उसको उसके कर्म का ,उसकी मेहनत का फल उसको दूंगा।    

इसलिए आप अपनी भक्ति के साथ मेहनत जरूर करे आपको लाभ अवश्य मिलेगा और आप पर भगवान की कृपा जरूर होगी क्युकी दोस्तों जो खुद की मदद करते है उसकी मदद स्वयं भगवान करते है। इसलिए अपने जीवन में हमेशा खुद की मदद करना सीखिए भगवान आपको स्वयं ही रास्ता दिखा देगा। 

 और दोस्तों रही बात भगवान को प्रसन्न करने की तो भगवान प्रसन्न होते आपकी सच्ची भक्ति से , आपकी सच्ची आस्था से, आपके  विश्वाश से ,दोस्तों भगवान तो आपके अंदर ये देखते  है कि आपके मन आपके ह्रदय में उनके लिए कितना भाव है कितनी श्रद्धा है।  इसलिए जब भी भक्ति करो तो पूर्ण भाव से  और निस्वार्थ भक्ति  कीजिये  तभी भगवान आप पर प्रसन्न होंगे।

और दोस्तों अंत में हम बस इतना ही कहना चाहते है मनुष्य जीवन एक मनुष्य को बड़ी मुश्किल से 84 लाख योनि के बाद नसीब होता है इसलिए अपने जीवन में कम से कम 5 या 10 मिनट भगवान के लिए उनके ध्यान के लिए जरूर निकले। 

क्योंकि भक्ति ही एक ऐसा मार्ग है जो व्यक्ति को अध्यात्म तक पहुंचाता है और भक्ति ही इंसान को मन से और तन से शांति प्रदान कराती है।  

तो दोस्तों आज के लिए बस इतना ही जय श्री राम जय हनुमान। 

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                                                जय श्री राम जय हनुमान 


 


  


   


 







              

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