जय देवभूमि जय उत्तराखंड -दोस्तों आज के आर्टिकल में हम आपको उत्तराखंड के बारे में बताएंगे इसलिए जो भी उत्तराखंड के बारे में नहीं जानते है वो ध्यान से इस आर्टिकल को पढ़े। क्योंकि हमें यकीन हैं आपको इस आर्टिकल में उत्तराखंड के बारे में जानने को काफी कुछ मिलेगा। दोस्तों उत्तराखंड जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। उत्तराखण्ड जो स्वर्ग के सामान सुन्दर है। जहां बड़े -बड़े पहाड़ और वादियां नदियाँ और झरने है।
दोस्तों यदि आप भारत में रहते हो तो आप एक बार जरूर उत्तराखंड आइये यकीन मानिये यह सुंदरता और यहां का नजारा देखकरआपको इस जगह को छोड़ने का मन नहीं करेगा।
अब बात करते हैं दोस्तों क्यों उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है-
दोस्तों शास्त्रों और पुराणों के अनुसार उत्तराखंड जिसको देवभूमि के नाम भी जाना जाता है कहते है सैकड़ो साल पहले अनेक ऋषि मुन्नी तपस्वी यहां तपस्या किया करते थे और अपने भगवान के दर्शन यहां इसी देवभूमि में पाते थे जिस कारण यहां अनेक देवी देवताओं और ऋषि ,मुनियों ने यहां अपना तप किया जिस कारण ये भूमि देवभूमि के नाम से जानी गयी। और हो भी क्यों ना यहां तो स्वयं भगवान ने भी तपस्या की है। जिसमे कोई संदेह नहीं है और ऐसे ही नहीं उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है।
वैसे दोस्तों ऐसे बहुत से कारण है जिस कारण उत्तराखंड का नाम देवभूमि पड़ा। क्या वो कारण आइये हम आपको बताते है।
कहते है दोस्तों पांडवों से लेकर देवी देवताओं ,ऋषि मुनि ने यहां तप किया और पुरे भारतवर्ष में इसी भूमि को तप के लिए चुना ,और कहते पांडव अपने अज्ञातवास के समय इसी उत्तराखंड में रुके थे।
ये बात सच है दोस्तों पूरे भारत में अनेक ऋषि ,मुनि और महात्मा ने भारतवर्ष में जन्म लिया है परन्तु देवभूमि कहलाने का गौरव केवल उत्तराखंड को मिला है।
ग्रन्थ महाभारत में महर्षि वेद व्यास ने देवभूमि उत्तराखंड का जिक्र किया है,इस देवभूमि को शास्त्रों में तपोभूमि का नाम दिया गया है।
दोस्तों उत्तराखंड देवभूमि में चार धाम है जिनको विश्व विख्यात पर्यटन क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यहां देवभूमि में केदारनाथ ,बद्रीनाथ ,यमनोत्री और गंगोत्री तीर्थ स्थल है। कहते है दोस्तों जो भी अपने जीवन के अंत समय में इन चार धामों के दर्शन करता है वो सीधा स्वर्ग लोक में जाता है ऐसी शास्त्रों और पुराणों में मान्यता है।
परन्तु दोस्तों आज के समय में बच्चे शादी -सुदा जोड़े यह अपनी छुटियाँ मानाने यह जाते है जो की सारासर गलत है।
दोस्तों ये चार धाम यात्रा इंसान को तभी करनी चाहिए जब यहां का बुलावा हो,घूमने के उद्देश्य से यहां नहीं जाना चाहिए क्योंकी ये घूमने की जगह नहीं बल्कि भक्ति और मोक्छ का मार्ग है। इसलिए चार धामों में श्रद्धा और विश्वाश के साथ जाये।
दोस्तों कहते है जब कलयुग का आरम्भ होने जा रहा था और भगवान श्री कृष्णा भी धरती को छोड़कर अपने धाम चले गए थे तो तब पांडवों ने अपना राज सुख भोग कर अपना राजपाठ अपने पुत्रों को सौंफ दिया था और तब पांडव इसी उत्तराखंड देवभूमि के रास्ते से स्वर्ग गए थे और कहते है केदारनाथ में भगवान शिव शंकर ने पांडवों को दर्शन दिए थे और यहां पांडवों ने अपने अस्त्र शस्त्र भगवान शिव के सामने त्याग दिए थे और फिर उनकी स्वर्ग यात्रा शुरू हुई थी। इसलिए तो दोस्तों केदारनाथ को स्वर्ग द्वार भी कहा जाता है क्योंकि यहां से युधिष्ठीर स्वर्ग गए थे।
आइये दोस्तों जानते है उत्तराखंड के इतिहास के बारे में दोस्तों आपको उत्तराखंड के बारे में केदारखंड और प्राचीन धर्म ग्रंथो के मिल जायेगा । दोस्तों यहां बहुत शासको और राजाओं ने राज्य किया जिसमें कत्यूरियों ,पालों ,चंद्र ,पंवारों और ब्रिटिश शासकों ने भी राज किया था।
कहते है दोस्तों वर्तमान उत्तराखंड आगरा और अवध संयुक्त प्रांत का हिंसा था कहते है यह प्रांत 1902 में अस्तित्व में आया फिर 1935 में इसे संयक्त प्रांत कहा जाने लगा और 1950 में इसका नाम उत्तरप्रदेश रखा गया और दोस्तों 9 नवंबर ,2000 को उत्तराखंड भारत का 27 वां राज्य बना और इससे पहले ये उत्तराखंड राज्य उत्तरप्रदेश का हिंसा था परन्तु अनेक आंदोलनकारी और क्रन्तिकारी वीरों के आंदोलन के कारण उत्तराखंड को अलग राज्य घोषित किया गया। परन्तु इस बीच उत्तराखंड में खून खराबा बहुत हुआ जिसमें अनेक लोग आंदोलन करते मारे गए। दोस्तों हिमालय की गोद में खूबसूरत राज्य उत्तराखंड देवभूमि राज्य की अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं है -इसके उत्तर से पश्चिम में हिमालय प्रदेश है और दक्षिण उत्तरप्रदेश है ,और उत्तर में चीन (तिब्बत) और पूर्व नेपाल से मिलती है।
दोस्तों उत्तराखंड की 90 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। राज्य की कुल खेती क्षेत्र 767,571 हेक्टयर है।
उद्योग और खनिज - राज्य में चुनापत्थर ,राक फास्फेट ,डोलोमाइट , मैग्नेसाइट, तांबा, ग्रेफाइट, जिप्सम आदि के अधिक भंडार है। और राज्य में 34231 लघु
औद्योगिक इकाइयां है ,जिसमे 177677 लगभग को लोगों को रोजगार मिला है और दोस्तों यह अधिकांश उद्योग वन आधारित उद्योग है।
दोस्तों उत्तराखंड के प्रसिद्ध त्यौहार है विश्वा प्रसिद्ध कुंभ मेला जो हरिद्वार में हर 12 साल व छटवें वर्ष के अंतराल में मनाया जाता है। उत्तराखंड के प्रमुख मेले -देवीधुरा मेला (चंपावत)पूर्णागिरि मेला (चंपावत), नंदा देवी मेला (अल्मोड़ा), गौचर मेला (चमोली), बैसाखी (उत्तरकाशी), माघ मेला (उत्तरकाशी), उत्तरायणी मेला (बागेश्वर), विशु मेला (जौनसार बावर), पीरान-कलियार (रुड़की), फूल देई,और नंदा देवी राज जात यात्रा हर बारहवें वर्ष होती है।और श्रीनगर गढ़वाल का मेला बैंकुंठ चतुर्दर्शी का मेला है जो की क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध मेला है जिसको लोग बड़े धूम -धाम से मनाते है।और दोस्तों इसी जगह श्रीनगर में महादेव जी का उत्तरखंड का सबसे प्रसिद्ध मंदिर महादेव कमलेश्वर का मंदिर है। और दोस्तों इसके पीछे भी पुराणों में कथा है ,कहते है भगवान श्री विष्णु ने यहां तपस्या की थी और फिर भगवान शिव शंकर ने उनको सुरदर्शन चक्र प्रदान किया था। और यहां ही विशाल नदी अलकनंदा बहती है जिसमे अब अलकनंदा डेम बना हुआ है।
दोस्तों उत्तराखंड की राजधानी देहरादून है और परन्तु ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण है और उत्तराखंड के राज्य का कुल क्षेत्रफल 53 ,489 वर्ग कि.मी. है।
राज्य कुल क्षेत्रफल 53,483 वर्ग कि. मी को हैं।
दोस्तों उत्तराखंड की राजधानी देहरादून है और परन्तु ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण है और उत्तराखंड के राज्य का कुल क्षेत्रफल 53 ,489 वर्ग कि.मी. है।
दोस्तों उत्तराखंड में 13 जिले है और 2011 की जनगणना के अनुसार 1,00,86292 निवासियो की है ,और दोस्तों उत्तरखंड में साक्षरता दर 79.63% है।
दोस्तों उत्तरखंड में गढ़वाल में गढ़वाली और कुमाऊं में कुमाऊंनी बोली जाती है।
तो आशा करते है दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको उत्तराखंड के बारे में अच्छे से बता पाए होंगे तो दोस्तों आज के लिए में बस इतना ही।
देवभूमि उत्तराखंड।