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जानिए उत्तराखंड के घंडियाल (घंटाकर्ण) देवता के बारे में सम्पूर्ण जानकरी।

 


देवभूमि उत्तराखंड जो देवताओं के निवास स्थान के नाम से जाना जाता है। देवभूमि जहां अनेक ऋषि ,मुनि और देवताओं ने इस देवभूमि में तपस्या की।

यह के कण -कण में देवों का वास है आपको उत्तराखंड के हर एक गांव में किसी न किसी देवता का मंदिर जरूर मिल जायेगा। जिनका इतिहास बेहद ही रोचक है। इन्हीं  उत्तरखंड के देवताओं में से एक देवता  है घंडियाल देवता जो की पुरे उत्तराखंड में पूजे और माने जाते है।  

दोस्तों इससे पहले आपने शायद घंडियाल देवता के बारे में सुना या तो पढ़ा होगा परन्तु क्या आप जानते हो घंडियाल देवता पहले देवता नहीं थे बल्कि पहले एक राक्षस थे जी हाँ दोस्तों आज हम आपको घंडियाल देवता के बारे में सम्पूर्ण जानकारी बताएँगे। 

दरअसल दोस्तों घंडियाल देवता पहले एक राक्षस थे जिनके कान में बड़े - बड़े घंटाकर्ण थे और बचपन से वो राक्षस  थे और वे शिव के अनन्य भक्त थे भगवान में इनकी बहुत आस्था और श्रद्धा थी की भगवान शिव की भक्ति और भगवान शिव का नाम किसी  के मुँह से सुनना भी उनको पसंद नहीं था. इसलिए उन्होंने अपने कानों में बड़े - बड़े घंटे धारण कर दिए और जब भी वो चलते थे तो भगवान शिव का नाम लेकर और जब वो चलते तो उनके घंटाकर्ण की आवाज़ बहुत तेज आती थी जिस कारण उनको किसी और के मुँह से से भगवान शिव का नाम नहीं सुनाई देता था और तब वो आसानी से भगवान शिव के नाम का जयकारा लगाया करते थे। 

दोस्तों घंडियाल देवता को अदिबद्री भी कहा जाता है क्योंकी ये बद्रीनाथ धाम में रक्षक का कार्य करते है और इनको बद्रीनाथ का द्वारपाल भी कहा जाता है क्योंकी भगवान विष्णु ने इनको बद्रीनाथ का द्वारपाल बनाया था। दोस्तों इनके कानों में बड़े - बड़े घंटे थे इसलिए इनका नाम घंटाकर्ण पड़ा। जब भगवान शिव - घंडियाल देवता या (जो पहले राक्षस) थे  जब इनकी भक्ति  और तपस्या  से शिव खुश हुए तो भगवान शिव शंकर ने इनको दर्शन दिए।  फिर भगवान शिव शंकर ने उस  राक्षस से वरदान मांगने को कहा तब वरदान स्वरूप उस राक्षस ने भगवान शिव शंकर से अपनी मुक्ति की इच्छा  जतायी  ।दरअसल  वो अपने राक्षस रूप से मुक्ति पाना चाहता था और वो अपनी राक्षसी शरीर से मुक्ति चाहता था इसलिए उस राक्षस ने भगवान शिव से अपनी मुक्ति के लिए कहा। 

दोस्तों राक्षस का वरदान सुनकर भगवान शिव ने उस राक्षस से  कहा अगर  कोई तुमको मुक्ति दे सकते हैं तो वो हैं भगवान विष्णु। तुमको नारायण की  शरण में जाना चाहिए। 

परन्तु दोस्तों भगवान शिव की ये बात सुनकर वो घंटाकर्ण राक्षस दुखी हो गया क्योंकि वो भगवान शिव के अलावा किसी अन्य देव की भक्ति नहीं करता था वो किसी अन्य को नहीं मानता था इसलिए भगवान विष्णु   की शरण में वो घंटाकर्ण  राक्षस नहीं जाना चाहता था न उनकी भक्ति करना चाहता था।परन्तु भगवान शिव की बात को आदेश मानकर उस राक्षस ने भगवान विष्णु की तपस्या की . फिर बाद में भगवान विष्णु की तपस्या और उनकी भक्ति कर उस  राक्षस  का  हृदय परिवर्तन हो गया। 

फलस्वरूप उसकी आस्था और श्रद्धा भगवान विष्णु में भी हो गयी फिर उस घंटाकर्ण राक्षस की तपस्या से खुश होकर भगवान विष्णु ने उस घंटाकर्ण राक्षस को मुक्ति प्रदान की और साथ में बद्रीनाथ धाम का द्वारपाल  बना दिया जिस कारण उस घंटाकर्ण राक्षस को घंडियाल देवता का पद मिला और तब से  ये बद्रीनाथ में आदिबद्री के नाम से भी जाने जाते है ।  

दोस्तों घंडियाल देवता  उत्तराखंड के सबसे बड़े देवतओं में से एक देवता माने जाते है और ये देवताओं के राजा के रूप में भी जाने जाते है

कहते है दोस्तों घंडियाल देवता ही द्वापरयुग में अभिमन्यु थे और कहा जाता है जो उत्तराखंड में नागराज देवता है वो श्री कृष्णा के रूप है दरअसल दोस्तों भगवान श्री कृष्णा महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद - कहते है उत्तराखंड देवभूमि के पौड़ी में एक जगह है सेम मुखेम वहाँ नागराज रूप में आये थे और वहाँ नागराज के रूप में बस गए। 

ये तो आपको पता ही होगा भगवान श्री कृष्णा अभिमन्यु के मामा लगते थे और कहते है अभिमन्यु ही घंडियाल देवता है जिस कारण आज भी जब किसी व्यक्ति पर घंडियाल देवता आता है तो वो नागराज के साथ नाचते है और उनको अपना मामा (मामू) कहते  है।

दोस्तों घंडियाल देवता एक ऐसे  देवता है जो शक्तिशाली होने के साथ  दयावान देवता भी है और अपने भक्तों की सहायता के लिए ये उनकी एक ही पुकार पे किसी व्यत्कि पर प्रकट हो जाते है जी हां दोस्तों उत्तराखंड में घंडियाल देवता किसी व्यक्ति पर आता है या परिवार के किसी व्यक्ति पर प्रकट हो सकता है। और खासकर ये देवता अपनी धयानि (परिवार की लड़कियों की सहायता करने के लिए तुरंत उनके पुकारने पर चले जाते है )इसलिए ये घंडियाल देवता को जस वाले देवता भी कहा जाता है मतलब ये देवता अपने भक्तों और लोगों की सबसे जल्दी पुकार सुनते है।   

तो दोस्तों  ये थी उत्तराखंड के घंडियाल देवता की सम्पूर्ण कहानी। आशा करते है आपको घंडियाल देवता के बारे में जानकर अच्छा लगा होगा।  

 








  

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