हनुमान जी क्यों उड़ सकते है और श्री राम और अन्य व्यक्ति क्यों नहीं
दोस्तों हनुमान जी माता अंजना के और केसरी के पुत्र है साथ ही हनुमान जी शिव अंश होने के साथ पवन पुत्र भी है।
पवन पुत्र होने के कारण हनुमान जी हवा में तेज गति से उड़ सकते है।
अब दोस्तों आपका सवाल होगा कि हनुमान जी ही क्यों हवा में उड़ सकते है और प्रभु श्री राम और अन्य व्यक्ति क्यों नहीं ?
तो दोस्तों वो इसलिए क्योंकि श्री राम जी का जन्म सामान्य मनुष्य के रूप में धरती पे हुआ था और हनुमान जी अंजना माता के पुत्र के साथ पवन पुत्र भी थे जिस कारण हनुमान जी उड़ सकते थे।
दरसल दोस्तों प्रभु श्री राम भगवांन विष्णु के अवतार है और भगवान विष्णु ने धरती में श्री राम के रूप में जन्म लिया था ।
श्री हनुमान को ये संसार अनेक नामों से जनता है जैसे कि - हनुमान जी , पवनपुत्र , बजरंगबली , अमितविक्रमी , रुद्ररूप , शिव रूप , रामेष्ट , सीताशोकनाशक , लक्छमणप्राणदाता , अंजनापुत्र , केसरीनन्दन ,आदि नामों से श्री हनुमान जी को जाना जाता है।
कहते है हनुमान जी के उड़ने का वेग बहुत अधिक है। आप हनुमान को अपना सुपर हीरो भी मान सकते हो हलाकि फिल्मों में आपने ऐसे बहुत से सुपर हीरो की मूवी देखी होगी परन्तु वो वास्तविक नहीं होते है , परन्तु हमारे श्री हनुमान जी सच में वास्तविक में उड़ सकते है वो भी तीव्र वेग के साथ।
दोस्तों क्या आप अंदाजा लगा सकते हो श्री हनुमान जी कितनी तेजी से उड़ सकते थे। आपको ये तो पता होगा संजीवनी बूटी श्री हनुमान जी एक ही रात में हिमालय से लाये थे वो भी इतने दूर से । और अगर हनुमान जी एक ही रात में संजीवनी बूटी नहीं लाते तो लक्छ्मण जी के प्राण चले जाते इसलिए श्री राम जी की आज्ञा का पालन कर श्री हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी लेकर आए । अब चलिए आपको बताते है श्री हनुमान जी कितनी तेजी से संजीवनी बूटी लेकर आये।
हनुमान जी की उड़ने की रफ्तार
वैसे तो श्री हनुमान जी के उड़ने की रफ्तार का सही अंदाजा लगाना बहुत कठिन और असंभव है। परन्तु फिर भी हम गणित और भूगोल मैप के सहारे से श्री हनुमान जी के उड़ने की रफ्तार का पता लगाने की कोशिश करेंगे ।
दोस्तों सभी जानते है की लक्छमण को जब मेघनाथ ने मूर्छित किया था तो श्री राम जी की आज्ञा पाकर श्री हनुमान जी लंका से हिमालय संजीवनी बूटी लेने गए थे एक ही रात में इतना लम्बा सफर तय करने के लिए हनुमान जी रफ्तार कितनी तेज रही होगी । आइये जानते है ।
जिस तरह से श्री हनुमान जी एक ही रात में संजीवनी बूटी लेने गए वो भी श्रीलंका से हिमालय और पूरा पर्वत उठाकर वापस श्रीलंका गए तो फिर निश्चित ही उनके उड़ने की रफ्तार बहुत तेज रही होगी ।
परन्तु कितनी तेज ( एक फाइटर जेट ) जितना या फिर उससे भी अधिक ।
दोस्तों उस युग में घड़ी तो नहीं थी परन्तु हमें रफ्तार को मापने के लिए उस जमाने के समय का अनुमान लगाना होगा।
शास्त्रों के अनुसार उस युग में एक रात को चार प्रहर कहा जाता था मतलब की एक प्रहर यानि की तीन घंटे का।
रामायण के अनुसार लक्छ्मण जी जब मूर्छित हो गए थे उस वक्त समय रात्रि का तीसरा प्रहर शुरू हो गया था यानि की रात के 12 बजे।
और फिर उस दौरान हनुमान जी का लंका में जाना और रावण के सुसैन वेद को लाना और फिर सुसैन वेद का लक्छ्मण की जाँच करने और संजीवनी बूटी की सलाह देने में कम से कम एक घंटा तो लगा होगा तो दोस्तों हम ये कह सकते है श्री हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने एक या डेढ़ बजे लंका से निकले होंगे और सूर्य उदय होने से पहले यानि की पांच बजे से पहले वापिस संजीवनी बूटी लेकर आ गए होंगे।
मतलब श्री हनुमान जी साढ़े तीन घंटे में हिमालय से द्रोणागिरी पर्वत उठाकर कर श्री लंका लेकर आये होंगे।
लेकिन दोस्तों इन साढ़े तीन घंटों में हमें कुछ समय कम करना होगा क्योंकि रास्ते में हनुमान जी को कहीं बाधाएं हुई थी।
पहली बाधा - कालनेमि राक्षस ने खुद को प्रभु श्री राम का भक्त बताया और वो राम नाम का जाप भी कर रहा था जिस कारण हनुमान जी उस राक्षस के कहने में आ गए और हनुमान जी उस राक्षस को राम भक्त मानने लगे । परन्तु बाद श्री हनुमान जी ने कालनेमि राक्षस का अंत कर दिया था । यानि की कालनेमि वध और इन सब में हनुमान जी का आधा घंटा जरूर खराब हुआ होगा ।
दूसरी बाधा- उसके बाद बजरंगबली ने उड़ान भरी और द्रोणागिरी पर्वत को लेने गए लेकिन जब हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत के पास गए तो उनको वो जड़ी - बूटी नहीं मिली जो सुसैन वेद ने मंगायी थी क्योंकि हनुमान जी वेद नहीं थे इसलिए वो जड़ी - बूटी को पहचान नहीं सके इसलिए संजीवनी बूटी के लिए हनुमान जी काफी समय तक भटकते रहे इसमे उनका कम से कम आधा घंटा खराब हुआ होगा फिर बूटी को न पहचान पाने की वजह से श्री हनुमान जी ने पुरे द्रोणागिरी पर्वत को ही उखाड़ लिया और वापिस लंका की ओर आने लगे।
तीसरी बाधा - इसके बाद जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर लंका जा रहे थे तो प्रभु श्री राम के भाई भरत ने हनुमान जी को राक्षस समझकर बाण मार दिया फिर हनुमान जी का भरत जी को अपने बारे में बताने और जानने में आधा घंटा लगा होगा अब हनुमान जी के उड़ने की समय की बात करे तो सिर्फ दो घंटे थे और सिर्फ इन्हीं दो घंटों में वो लंका से द्रोणागिरी पर्वत लेकर लंका आये।
अब अगर हम हनुमान जी के द्वारा तय की गयी दूरी को देखें तो गूगल मैप के अनुसार श्री लंका से द्रोणागिरी पर्वत तक की दूरी लगभग 2500 किलोमीटर तक है। यानि की ये दूरी दोनों तरफ मिलाकर 5000 किलोमीटर है और हनुमान जी ने यही 5000 की दूरी 2 घंटे में तय की थी आपको बता दे बाद में हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत वापिस हिमालय भी लाये थे।
इस हिसाब से दोस्तों हनुमान जी की उड़ने की रफ्तार 2500 किलोमीटर / घंटा निकलती है।
तो दोस्तों इसकी तुलना यदि ध्वनि की तुलना से करे तो उसकी तुलना में हनुमान जी की गति दो गुना अधिक है । आधुनिक भारत के पास लडाकू जेड विमान मिग- 29 की रफ्तार 2400 किलोमीटर / घंटा है । अगर इसकी तुलना हनुमान जी की रफ्तार से करे तो
यहां पर हनुमान जी की रफ्तार अधिक निकलती है। यानि हनुमान जी आधुनिक भारत के पास मौजूद सबसे तेज लड़ाकू विमान से भी तेज उड़ते थे।
परन्तु दोस्तों हम भगवान की शक्ति का ताकत का अंदाजा आज के आधुनिक उपकरणों से नहीं लगा सकते है।
हनुमान जी भी ईश्वर है इसलिए उनके बारे में उनकी शक्ति का अंदाजा लगाना संभव नहीं है।
हनुमान जी रफ्तार लाइट की रफ्तार या फिर उससे भी अधिक हो सकती है या कह सकते है उनके आने और जाने की रफ्तार अनंत है बस हनुमान जी अपनी लीला दुनिया के सामने दिखाने के लिए उड़े नहीं तो हनुमान जी तो इतने शक्तिशाली है कि शायद पलक जपकते स्थान बदल सकते है। सच बात तो ये है कि श्री हनुमान जी की शक्ति की तुलना करना असंभव है इसलिए तो इस घोर कलयुग में श्री हनुमान जी अपने भक्तों के सभी दुख दूर करते है और आपकी जानकारी के लिए बता दे भारतवर्ष में श्री हनुमान जी के सबसे अधिक मंदिर है।
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