जय श्री राम दोस्तों जय हनुमान कैसे है आप सब. दोस्तों अक्सर कहीं बार ऐसा होता है जब आप बीमार होते हो तो कहीं बार आप पर दवाई असर नहीं करती है कहि बार आप डॉक्टर पे भी जाते हो परन्तु डॉक्टर उस बीमारी को सही नहीं बता पता है आप यकीन करो या न करो दोस्तों परन्तु कुछ चीजे ऐसी होती है जो दवाई खा कर भी सही नहीं होती है और अगर वो सही होता है तो वो सिर्फ भगवान की शक्ति से।
इसलिए कहा जाता है कि "दवाई के साथ साथ कभी कभी दुआ की भी जरुरत पड़ती है''।
इसलिए दोस्तों आज हम आपको इस ब्लॉग में श्री हनुमान जी के हनुमान बाहुक पाठ के बारे में बतायंगे जिसका यदि आप पाठ पढ़ते हो तो यकीन मानिये कोई सा भी रोग या गंभीर सी गंभीर बीमारी ही क्यों न हो यदि आप इस पाठ को नियम से और हनुमान जी पर पूर्ण विश्वाश कर के पढ़ते हो तो ये हमारा खुद का अनुभव है और विश्वाश है यदि आप किसी बीमारी से या आपका कोई परिजन किसी बीमारी से लंबे समय से परेशान है तो आपको ये पाठ जरूर करना चाहिए।और वैसे भी दोस्तों आज के कोरना काल के समय में ये पाठ करना बहुत ही लाभदायक है क्यकि इस पाठ को करने से आपके शरीर में शक्ति और रोगप्रतिरोधक की छमता बढ़ जाती है क्युकी दोस्तों ये पाठ स्वयं श्री तुलसीदास जी ने लिखा था।
दोस्तों श्री हनुमान बाहुक पाठ के बारे में बताने से पहले हम आपको बता दे कि, विश्वाश बहुत बड़ी चीज होती है विश्वाश में बहुत बड़ी शक्ति होती है , हमारे हिन्दू धर्म में तो पत्थर की भी पूजा कर उसको भगवान का दर्जा दिया जाता है और ये बात सच भी है, गीता में भगवान श्री कृष्णा के द्वारा कहा भी गया है "मैं तो सब जगह हूँ तुम मुझे जिस स्वरूप में मानोंगे में उसी स्वरूप में तुमको दिखूंगा ". तो इसलिए हम आपको हनुमान बाहुक पाठ के बारे में बताने से पहले बस ये ही समझना चाहते है - यदि आप भगवान की शक्ति पर विश्वाश करते हो मंत्रो की शक्ति पर विश्वाश करते हो तो तभी आप ये पाठ पढ़े अन्यथा नहीं। क्युकी जहाँ विश्वाश नहीं है वहाँ भगवान कैसे हो सकते हैं।
आइये जानते हैं श्री हनुमान बाहुक पाठ के बारे में सम्पूर्ण जानकारी
दोस्तों हनुमान बाहुक पाठ के बारे में बताने से पहले हम आपको बता दे की कैसे हनुमान बाहुक पाठ की रचना हुई।
हनुमान बाहुक पाठ की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। क्युकी कलयुग के प्रभाव से तुलसीदास जी के शरीर पर फोड़े -फुंसी और अनेक बीमारी हो गयी थी. तुलिदास जी ने बहुत उपाय किये, वैध के पास गए ,तांत्रिक के पास गए ,देवताओं की भी खूब पूजा की ,खूब हवन किये, टोटके किये ,परन्तु तुलसीदास जी का शरीर सही नहीं हुआ। अंत में वो श्री हनुमान जी के शरण में गए और तब उन्होंने श्री हनुमान बाहुक पाठ 44 पद्यों की रचना की .और तब जा के उनके शरीर के सारे रोग सारे फोड़े फुंसी सब दूर हो गए और तब से लेकर आज तक इसी हनुमान बाहुक पाठ को करने की सलाह बड़े -बड़े संत महात्मा उन सबको देते है जिनका रोग अत्यधिक उपचार करने पर भी सही नहीं हो रहा है और वो बस दवाई ही खा रहे है।
इसलिए यदि आप या आपका कोई परिजन किसी लम्बी बीमारी से जूझ रहा है तो आप एक बार नियम से इस हनुमान बाहुक का पाठ जरूर करे यकीन मानिये जहां हॉस्पिटल के इतने चक्कर काटने पर भी आप सही नहीं होते वहां आप एक बार इस पाठ को नियम और विधि से पढ़कर देखिये यकीन मानिये आप जरूर स्वस्थ हो जायंगे। और हम दुबारा वो ही बात कहेंगे "कभी कभी दवा के साथ दुआ की भी जरूरत होती है" इसलिए अपनी दवा के साथ यदि आप इस शक्तिशाली हनुमान बाहुक पाठ को पढ़ते हो तो आपको जरूर लाभ होगा। परन्तु इसका मतलब ये नहीं है दोस्तों कि इस हनुमान बाहुक का पाठ को बस वो ही करे जो बीमार है। ऐसा नहीं है हनुमान बाहुक का पाठ हर कोई पढ़ सकता है और इसका लाभ ले सकता है इसमे कोई बंधन नहीं है।
जानिए हनुमान बाहुक पाठ को पढ़ने के नियम
1 - सबसे पहले सुबह उठकर आप स्नान कर ले उसके बाद आप स्वच्छ वस्र धारण कर ले उत्तम होगा यदि आप लाल ,पीले ,केसरिया रंग के वस्त्र पहने ध्यान रखे आप हरे ,नीले , काले रंग के वस्र बिलकुल भी न पहने।
2 - जिस दिन आप पाठ करे उस दिन सात्विक रहे ,मीट ,अंडा,मांस ,मदिरा का सेवन बिलकुल न करे।
3 - और वैसे भी दोस्तों श्री हनुमान जी की किसी भी पूजा में आप हमेशा ध्यान रखे हमेशा पाठ करने से पहले और पाठ करने के बाद अपने मन में अच्छे विचार रखे और उस दिन सात्विक खाना खाएँ ,खाने में आप प्याज ,लहसुन न खाये।
4 - पाठ शुरू करने से पहले आप प्रथम पूज्य श्री गणेश की पूजा करे उसके बाद सीता राम का ध्यान करे और फिर तब श्री हनुमान जी का पाठ शुरू करे।
5 - जब आप पाठ शुरू करे तो संकल्प जरूर ले और बिना संकल्प के पाठ शुरू न करे और जितने दिन का आप आप पाठ करना चाहते हो उतने दिन का संकल्प ले। क्युकी दोस्तों बिना संकल्प के पूजा आधी अधूरी मानी जाती है इसलिए संकल्प जरूर ले।
6 - यदि आप 45 दिन या 21दिन तक नियम से ये पाठ करते हो तो यकीन मानिये आपका कष्ट रोग जरूर दूर होगा। और जितने दिन आप ये पाठ करना चाहते हो उतने दिन का संकल्प ले और उतने ही दिन का पाठ करे।
7 -ध्यान रखे जब आप पाठ करने बैठे तो एक गिलास में जल भरकर मंदिर में श्री हनुमान जी के सामने रख दे और जब पाठ पूरा हो जाये तो उस जल को पीले।
8 - जब आप पाठ पूरा पढ़ ले तो अंत में श्री हनुमान जी से अपने कष्ट निवारण के लिए प्रार्थना करे।
1 - यदि आप गठिया ,कैंसर ,वात ,सिरदर्द ,कंठ रोग ,जोड़ो का दर्द ,इत्यादि तरह के दर्द रोग से परेशान है ,तो जल का पात्र(गिलास ) सामने रखकर हनुमान बाहुक को 21 या 45 दिनों तक मुहूर्त देखकर पाठ करे। प्रीतिदिन उस जल को पीकर दूसरे दिन जल रखे। हनुमान जी की कृपा से शरीर की समस्त पीड़ाओं से आपको मुक्ति मिल जाएगी।
2 - यदि आपको शक है किसी ने आप पर जादू टोना किया है ,या आपको किसी ने कुछ खिलाया हुआ है तो आप इस पाठ को पढ़ सकते है।
3 -हनुमान बाहुक का पाठ आपको भूत -प्रेत जैसी बाधाओं से भी दूर रखता है।
4 - हनुमान बाहुक पाठ करने वाले व्यक्ति के शरीर के बाहर से एक रक्छा कवच बन जाता है ,जिससे कोई भी बुरी शक्ति व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा सकती नकारात्मक शक्ति व्यक्ति को छू भी नहीं सकती।
5 - दोस्तों यदि आपको लगे आपके जीवन में अधिक कष्ट रोग आ रहे जो सही नहीं हो रहे हैं तो आप जरूर हनुमान बाहुक पाठ को पढ़े विश्वाश मानिये आपको जरूर लाभ होगा।
तो दोस्तों आज के लिए इस ब्लॉग में बस इतना ही और दोस्तों हमारी एक बात हमेशा याद रखना यदि आप थक चुके हो परेशान हो चुके हो अस्पताल के चक्कर मार के और आप पर दवाई असर नहीं कर रही है तो आप एक बार इस पाठ को नियम से पढ़े यकीन मानिये आप सही हो जायेंगे यदि आप सही तरीके से और नियम विधि से पाठ करते हो .
और विश्वाश करे दोस्तों मन्त्र और पाठ में बहुत शक्ति होती है इसलिए तो पहले ज़माने में ऋषि मुनि इन मंत्रो का और पाठों का जाप और तप कर स्वस्थ रहते थे।
तो दोस्तों आज के लिए इस ब्लॉग में बस इतना ही यदि आपको आगे भी श्री हनुमान जी के बारे में और हिन्दू धर्म के बारे में और भी अधिक जानकारी जानना चाहते हो तो हमारे ब्लॉग को जरूर फॉलो और सब्सक्राइब करे ताकि आपको सबसे पहले हमारे नए ब्लॉग की जानकारी मिलती रहे।
जय श्री राम जय हनुमान


